कोरोना से 10 लाख टन चावल के एक्सपोर्ट पर संकट, किसानों की आमदनी पर पड़ेगा असर

रायपुर नगर निगम सर्वे कर राशन कार्ड विहीन लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही है. (File Photo)

बासमती चावल (Basmati Rice) की बात करें तो सबसे ज़्यादा ईरान (Iran) को भेजा जाता है. वहीं बासमती चावल खरीदने वाले टॉप 6 में 5 देश खाड़ी (Gulf country) के हैं.

नई दिल्ली. वैसे तो भारत ही नहीं दुनिया के सभी देशों में किसी न किसी शक्ल में कोरोना वायरस (Corona Virus) का असर दिखाई दे रहा है. कहीं बीमारी की शक्ल में तो कहीं कारोबार पर उसका असर दिखाई दे रहा है. अपने देश में  चावल एक्सपोर्ट (Rice Export) पर कोरोना का बड़ा असर दिखाई देने लगा है. अगर अंदेशा सही निकला तो इसका सीधा असर देश से एक्सपोर्ट होने वाले 10 लाख टन चावल पर दिखाई देगा. बासमती चावल  (Basmati Rice) की बात करें तो सबसे ज़्यादा ईरान (Iran) को भेजा जाता है. वहीं इसके टॉप 6 में से 5 खरीदार देश खाड़ी  (Gulf country) के हैं.

आपको बता दें कि 25 फीसदी ग्लोबल शेयर के साथ भारत दुनिया का सबसे बड़ा राइस एक्सपोर्ट करने वाला देश है.

 एग्रीकल्चर एक्सपर्ट बीके आनंद ने न्यूज18 हिंदी को बताया कि एक्सपोर्ट थमने से देश में धान के भंडारन पर असर होगा. क्योंकि भारत हर महीने 10 लाख टन एक्सपोर्ट करता है. आनंद बताते हैं कि अगर एक से दो महीने तक एक्सपोर्ट थमा तो ज्यादा असर नहीं होगा. वहीं, इसकी अवधी बढ़ी तो व्यापारियों के साथ-साथ किसानों की आमदनी पर भी असर पड़ सकता है.

14 से 15 लाट टन बासमती ईरान को होता है एक्सपोर्टऑल इंडिया राइस एक्सपोटर्स एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक विनोद कौल बताते हैं कि साल 2018-19 में ईरान को 14.5 लाख टन बासमती राइस एक्सपोर्ट किया गया था. हालांकि मार्च में कोरोना के चलते ईरान जाने वाले चावल पर इतना असर नहीं दिखाई दे रहा है. लेकिन अप्रैल में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. क्योंकि अब धीरे-धीरे वहां कोरोना का ज़्यादा असर दिखाई दे रहा है. सऊदी अरब में भी कई केस सामने आने के बाद वहां से भी कारोबार को लेकर कभी भी एडवाइजरी जारी हो सकती है. यहां हर महीने करीब 70 से 75 हजार टन बासमती राइस भेजा जाता है.

सभी तरह का 10 लाख टन चावल भारत से होता है एक्सपोर्ट

कौल बताते हैं कि खाड़ी देशों में सबसे ज़्यादा बासमती राइस एक्सपोर्ट होता है. लेकिन दूसरे देशों में 75 से 80 लाख टन गैर बासमती राइस भी एक्सपोर्ट होता है. मतलब हर महीने का 6 से 6.5 लाख टन चावल देश से जाता है. दोनों तरह के चावल मिलाकर यह नंबर करीब 10 लाख टन का हो जाता है. मार्च से तो असर दिखाई ही देने लगा है, लेकिन सबसे ज़्यादा परेशानी अप्रैल में आने वाली है. अगर जल्द ही कोरोना के संक्रमण पर काबू नहीं पाया गया तो दुनियाभर में कई तरह के ऐहतियात भरे कदम उठाए जाएंगे, जिसमे सबसे पहले होने वाली चीज यह है कि एक देश से दूसरे देश में आना-जाना रोक दिया जाता है.

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