धनिये की खेती करने से जुड़ी सभी जानकारी आपको यहां मिलेगी.

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भोपाल के ग्राम देवलखेड़ी में खेती करने वाले प्रगतिशील युवा किसान विनोद कुशवाह ने न्यूज 18 अन्नदाता की टीम से खास बातचीत में बताया हैं कि वह इस समय एक एकड़ पर हरी पत्ती के लिये धनियां (Coriander Farming Guide) की खेती कर रहे हैं और इससे लाखों रुपये की आमदनी हो रही हैं.


  • News18Hindi

  • Last Updated:
    February 7, 2020, 7:16 AM IST

नई दिल्ली. कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो इंसान कुछ भी हासिल कर सकता है. इसी कहावत को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के एक किसान ने सच कर दिखाया है. भोपाल के ग्राम देवलखेड़ी में खेती करने वाले प्रगतिशील युवा किसान विनोद कुशवाह धनिया (Coriander Farming in India) की खेती कर लाखों रुपये कमा रहे हैं. न्यूज18 अन्नदाता की टीम से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि वह इस समय एक एकड़ पर हरी पत्ती के लिए धनियां (Coriander Farming Guide) की खेती कर रहे हैं और इस फसल की तीन बार कटाई करने पर उन्हें औसत उत्पादन 130 क्विंटल होता हैं. इसे बाजार में औसतन मूल्य 1000 रुपये प्रति क्विंटल में बेचते हैं. इस तरह उनकी आमदनी 1,30,000 रुपये हुई. वहीं, इसे उगाने पर उनका कुल खर्च करीब 40,000 रुपये आता हैं. इस लिहाज से उन्हें 90,000 रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ. वो कहते हैं कि अगर खेत का क्षेत्रफल बढ़ा दिया जाए तो आमदनी लाखों रुपये में हो सकती हैं.

खेती कर लाखों कमाने का तरीका जानिए

विनोद कुशवाह बताते हैं कि अच्छा मुनाफा कमाने के लिए उन्होंने फसल का प्रबंधन सही ढंग से करना पड़ता हैं. सबसे पहले इसकी खेती के लिए समतल और अच्छे जल निकास वाली भूमि का चयन करना होता है. फिर भूमि की तैयारी के समय एक जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से की और दो बार जोतना होता हैं. कल्टीवेटर से पाटा लगा कर खेत को भुरभुरा और समतल करते हैं.

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इसके बाद में उसमें संतुलित पोषक तत्वों का प्रयोग किया जाता हैं. इसके बाद तैयार खेत में 6 फीट चौड़ी और 40-50 फीट लंबी क्यारियां बनाईं जाती हैं.

एक एकड़ प्रक्षेत्र में बुवाई के लिए 10 किलोग्राम बीज का इस्तेमाल किया जाता हैं. वे बीजों को बुवाई से पहले फफूंदनाशक दवा से उपचारित कर लेते हैं. इसके बाद ही क्यारियों में बीजों को छिटक देते हैं. फिर ट्यूबवेल द्वारा फसल में नियमित अन्तराल पर सिंचाई करते रहते हैं.

फसल में खरपतवारों के नियंत्रण के लिए मजदूरों द्वारा निराई-गुड़ाई करवा देते हैं. जिससे फसल खरपतवार मुक्त हो जाती है. इसके बाद 50 किलोग्राम यूरिया और 25 किलोग्राम डी.ए.पी. प्रति एकड़ प्रयोग में लाते हैं. फसल को कीटों से बचाने के लिये उचित कीटनाशी दवाओं का प्रयोग करते हैं.

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इस तरह इनकी फसल 1.5 से 2 महीने में तैयार हो जाती है. इसके बाद यह फसल की कटाई हंसिये के द्वारा करके उसे रस्सी के द्वारा बांधकर गड्डी तैयार कर लेते हैं. फिर उसे धुलवाकर बोरों में पैक करके बाजार में भेज देते हैं.

अनुग्रह तिवारी
अन्नदाता, न्यूज18 इंडिया





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