हजारों की भीड़ में भी कर लेगा कोरोना संक्रमित की पहचान, इस स्‍टार्टअप ने बनाया खास उपकरण

हैदराबाद में आईआईटी के तीन पूर्व छात्रों के स्‍टार्टअप ने ऐसा उपकरण बनाया है, जो भीड़ में भी संक्रमित व्‍यक्ति की पहचान कर उसे आइसोलेट करने में मदद करेगा.

आईआईटी (IIT) के तीन पूर्व छात्रों का बनाया ये उपकरण भीड़ में कोरोना संक्रमित (Corona Infected) की पहचान करने के बाद पुलिस और स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारियों को जानकारी देगा. इसमें लगे लाउडस्‍पीकर की मदद से उस व्‍यक्ति को रुकने और भीड़ से अलग (Isolate) होने को कहा जा सकता है.

नई दिल्‍ली. कोरोना वायरस जितनी तेजी से फैल रहा है, उतनी ही तेजी से उससे निपटने और बचने की तैयारियां भी की जा रही हैं. दुनियाभर के शोधकर्ता और वैज्ञानिक जहां कोरोना वायरस (Coronavirus) की वैक्‍सीन व दवा बनाने में लगे हैं. वहीं, दुनियाभर के टेक्‍नीशियंस रोबोट और दूसरे ऐसे उपकरण बनाने में जुटे हैं, जिससे वैश्विक महामारी के खिलाफ जंग में मदद की जा सके. इस बार आईआईटी (IIT) के तीन पूर्व छात्रों के स्‍टार्टअप ने ऐसा खास उपकरण बनाया है, जिसकी नजर से सार्वजनिक जगह पर घूम रहा संक्रमित व्‍यक्ति हजारों की भीड़ में भी छुप नहीं हो पाएगा. ये खास ड्रोन (Special Drone) संक्रमित व्‍यक्ति की पहचान ही नहीं करेगा, बल्कि तुरंत पुलिस और स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के अधिकारियों को इसकी सूचना भी दे देगा.

टेम्‍प्रेचर जांच कर संक्रमित को आइसोलेट करने में करेगा मदद
हैदराबाद में आईआईटी के पूर्व छात्रों का बनाया इंफ्रारेड कैमरे से लैस ये ड्रोन भीड़-भाड़ वाले इलाकों में कोविड-19 के लक्षण वाले शख्स को पहचान कर उसे आइसोलेट करने में मदद करेगा. दरअसल, ये ड्रोन भीड़ में मौजूद हर शख्‍स का बॉडी टेम्‍प्रेचर लेगा और जिसे बुखार होगा उसकी पहचान कर लेगा. कहा जा रहा है कि ये ड्रोन लॉकडाउन में मिली छूट के बाद संक्रमण के फैलने की रफ्तार को काबू रखने में काफी मदद कर सकता है. वहीं, लॉकडाउन पूरी तरह से खुलने के बाद वैश्विक महामारी के खिलाफ अहम हथियार साबित होगा. मारुत ड्रोन के सीईओ प्रेम कुमार विशालावथ ने कहा कि इस ड्रोन से थर्मल स्क्रीनिंग का फायदा यह है कि किसी को एक-एक आदमी के पास जाकर उसके तापमान की जांच करने की जरूरत नहीं है. इसकी मदद से भीड़ में खड़े बुखार वाले व्‍यक्ति की पहचान कर उसका कोविड-19 टेस्ट कराया जा सकता है.

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मारुत ड्रोन का दावा है कि थर्मल स्क्रीनिंग के लिए एयरबोर्न इंफ्रारेड कैमरों का कई तरीके से परीक्षण किया गया है. हर बार इससे मिले नतीजे सटीक साबित हुए हैं. एयरबोर्न थर्मल स्क्रीनिंग के नतीजों को पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम को रियल टाइम में भेजा जा सकता है. भीड़ में पहचाने गए गए संक्रमित शख्स को तुरंत आइसोलेट किया जा सकता है. ड्रोन की मदद से सीमित दूरी तक किसी शख्स को ट्रैक किया जा सकता है. वहीं, इसमें मौजूद लाउड स्पीकर के जरिये किसी शख्स को रुकने या भीड़ से दूर हटने के लिए चेतावनी भी दी जा सकती है. लॉकडाउन के दौरान आकाशवाणी के अंदाज में हैदराबाद और करीमनगर पुलिस ने ड्रोन का इस्तेमाल किया है.

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तेलंगाना में ड्रोन से किया जा रहा है सैनिटाइजर का छिड़काव
विशालावथ ने बताया कि स्टार्टअप पहले से ही तेलगांना सरकार के शहरी विकास विभाग के साथ मिलकर काम कर रहा है. हैदराबाद में मच्छरों के प्रकोप से बचने के लिए झीलों के किनारे और कचरे के ढेरों पर ड्रोन से एंटी लार्वल कैमिकल का छिड़काव किया गया था. वैश्विक महामारी के दौर में अब इसी तकनीक के जरिये तेलंगाना के 8 जिलों में सैनिटाइजर का छिड़काव किया जा रहा हैः इससे पैसा, समय और मेहनत तीनों की बचत हो रही है. स्टार्टअप कंपनी दूरदराज इलाकों में दवाएं पहुंचाने के प्रोजेक्ट पर भी काम कर रही है. कंपनी का दावा है कि अनलॉक-1 के दौरान एयरबोर्न थर्मल स्क्रीनिंग से कोविड-19 पर काबू पानो में सबसे ज्यादा मदद मिल सकती है.

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